#Quotes

“घर का कोई ऐसा कोना नहीं है,

 जहाँ धूप का बिछौना नहीं है।।”

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“धूप देखकर ललचाता है     मन,

जाने कितनी बातें भी बनाता है मन,

हजार उदासीयों के बीच,

फिर से खिलखिलाता है मन।। “

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“बन्दिशें हैं रूआसी हसरतों   के माफिक,

 जाने क्यूँ सच से नजरें भी   चुराता है मन,

 अब तो हजारों सपनों को     इन पलकों में

 बसाता है मन।। “

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