जरूरी है…….

मेरे लिए जरूरी है के मैं संभल जाऊं,

                                      बिखर जाऊं,

                                      निखर जाऊं,

खुद के दायरे में यूं ही अब संभल जाऊं

मेरे लिए जरुरी है …….

आँखों से कनखिया काटने लगी हैं ,

ये शामो शहर हर पलछिन ,

अब जरुरी तो है के ,

मैं वास्तविकता को समझ जाऊं

हद हो चुकी है ,

कल्पनाओं की पहरेदारी की,

अब जरुरी है के,

मैं यूँ ही वस्ताविक़ता को  पहलुओं में

ढालना सिख जाऊं,

मेरे लिए जरुरी  है……

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