ये कवितायें …..

हम कविताओं को कविताओं की तरह ही जीते हैं ,
हमशक्ल हुबहू भावनाओं को शब्दों में पिरोते है ,
हम चाहते नहीं के कभी कोई व्याकरनी बाधाएं मेरी कविताओं के आवेग ,उसकी गति में कोई रोक टोक लगाएं ,
बस जैसे जिस रूप में मन से बात निकली है वो लोगों तक पहूंच जाये ,
क्यूँ  बिना वजह हम भावनाओं की जलधारा इस कविता रूपी श्रीन्खला में किन्ही नियमों की दखलंदाजी करें ,
सच लिखना है जब तो सार्थक शब्दों के क्रम को स्वयं अनुरूपित ही करें ,
हमें जितनी भी पहचान मिली मेरे शब्दों मेरी भावनाओं ने दिलाई है ,
माँ सरस्वती की कृपा है जो ये कवितायें मेरे मन में उतर आई हैं ,
जग में मेरी भावनाओं को कविता रूपी अंजाम दिलाई हैं ,

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