रास्ते चलते ही रहते हैं मंजिलें भी राहों में ही मिल जाती हैं ,
राहें कुछ और आगे बढ़ जाती हैं,
कभी कहीं दूर तो कभी पास ही मंजिलों के ठिकाने तय कर जाती हैं ,
हमें किन्ही समय के पहलुओं को गिनने की जरुरत पड़ती भी क्यूँ है ?
ये तयशुदा समय तक हुबहू  हमशक्ल ठिकानों तक हमे पहुंचाती हैं ,
रास्तों का क्या कसूर ?
रास्तों की कुछ किस्से कवायदों का वाकया याद भी रहता है हमें ,
ये रास्ते ही तो हैं जो जिंदगी को जिंदगी बनाते हैं ,
कभी भी कहीं भी ये रास्ते नई सीख दे जाते हैं ,
ये रास्ते समय के उसूलों का परचम लहराते हैं ,

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ये कवितायें …..

हम कविताओं को कविताओं की तरह ही जीते हैं ,
हमशक्ल हुबहू भावनाओं को शब्दों में पिरोते है ,
हम चाहते नहीं के कभी कोई व्याकरनी बाधाएं मेरी कविताओं के आवेग ,उसकी गति में कोई रोक टोक लगाएं ,
बस जैसे जिस रूप में मन से बात निकली है वो लोगों तक पहूंच जाये ,
क्यूँ  बिना वजह हम भावनाओं की जलधारा इस कविता रूपी श्रीन्खला में किन्ही नियमों की दखलंदाजी करें ,
सच लिखना है जब तो सार्थक शब्दों के क्रम को स्वयं अनुरूपित ही करें ,
हमें जितनी भी पहचान मिली मेरे शब्दों मेरी भावनाओं ने दिलाई है ,
माँ सरस्वती की कृपा है जो ये कवितायें मेरे मन में उतर आई हैं ,
जग में मेरी भावनाओं को कविता रूपी अंजाम दिलाई हैं ,

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