मांग लूं हर एक दुआ …..

“मांग लूँ हर एक दुआ ,जो इस दिल के ख्वाहिशों का अंदाज़ा लगाती है ,

कभी आसमां तो कभी जमीं पे पंखों के परवाज़ का कारवां बनाती  है “

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जरूरी है…….

मेरे लिए जरूरी है के मैं संभल जाऊं,

                                      बिखर जाऊं,

                                      निखर जाऊं,

खुद के दायरे में यूं ही अब संभल जाऊं

मेरे लिए जरुरी है …….

आँखों से कनखिया काटने लगी हैं ,

ये शामो शहर हर पलछिन ,

अब जरुरी तो है के ,

मैं वास्तविकता को समझ जाऊं

हद हो चुकी है ,

कल्पनाओं की पहरेदारी की,

अब जरुरी है के,

मैं यूँ ही वस्ताविक़ता को  पहलुओं में

ढालना सिख जाऊं,

मेरे लिए जरुरी  है……

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सारी दुनिया से कहदो ……..

सारी दुनिया से कहदो के ,

 हमे दुनियादारी  की समझ नहीं ,

सारी खुशियों से कहदो के हमें, खुशियों की कदर नहीं

सारी दुनियां ……….

सारी आरज़ू में ढलकर हम फिर भी नया पयाम लिखते हैं

आंसुओं में ढ़लते हुए मुस्कानों का नया आयाम लिखता हैं ,

सारी दुनिया से कहदो ……..,

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किसने खुश्बुओ का ये रंग चुराया है….

 

किसने खुशबुओं का ये रंग चुराया है,

किसने खुश्बुओ को दिल से लगाया है,

क्यूँ खिलने लगे हैं गुलाब,

मौसम में बहार बनकर,

किसने सोई हुई आरज़ू को

फिर से जगाया है,

किसने खुश्बुओ का ये रंग चुराया है…..;