“थोड़ी सी धूप🌥🌥🌥”

सिर्फ उतनी ही धूप आती है मेरे घर में,

जितना के मैं मुस्कुराती हूँ,

🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤

अब ये बात और है के कभी कभी

मैं खुद को पहेलीयाँ भी बुझाती हूँ,

नए रंग नए रौशनी में नहाए हुए हर किरण

का दस्तूर है के,

वो बादलों से ऊँची होकर भी ,

धरती तक पहुँचने की जिद करती है।

🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤

बादलों ने तो उड़ते हुए,

नीले अम्बर का आकाश बनाया,

खुद का नीला नीला संसार बनाया।

पर रौशनी रौशनी धूप की किरण में चमकती हुई धरती तक आती है।

🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤

कभी कभी हर किरण धरती तक पहुँच भी नहीं पाती है,

और बादलों के साजिशों में उलझ के रह जाती है…..

उतनी ही धूप………….🌤🌤🌤🌤🌤

🌤🌤🌤🌤🌤🌤…….!!!!!!!

“स्मृति स्नेहा”

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🌸कविता🌸

हर रोज की यही कहानी है,

मैं हूँ तुम हो और संगीत की धुन में बहता हुआ पानी है,
यही हर रोज की कहानी है,
सरपरस्त हवाओं के शोर की गुस्ताखीयाँ ,
आज इन फिजाओं को बतानी है।
यही हर रोज की कहानी है,
शायद सरजमीं में गुलिस्ता का हर एक गुल,
इन खुश्बूओं की निशानी है।
यही हर रोज की कहानी है।
   “स्मृति स्नेहा”