जब कभी तूलिकाओं को हम पलटते हैं ,

हमें शब्द लिखित किताबों की याद आती है ,

तूलिकाओं में किन्ही रंगों की कमी है क्या ?

फिर से हमें बेरंग पन्नों पर छपी हुई लेखनी याद आती है ,

अभी सार्थक निरर्थक की बात भी नहीं ,

फिर से हमें ज्वलंत मुद्दों की कहानी याद आती है ,

जब कभी तूलिकाओं को हम पलटते हैं ,

हमें शब्द लिखित किताबों की याद आती है ……….

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सीने में दहक ,फिर भी आँखों में चमक लिए तुम आगे बढ़ना ,

पैरों में कांटें चुभे , तीक्ष्ण तीरों सी बाते सुनके भी तुम आगे बढ़ना ,

कभी तेज़ धूप से जलता हो तन मन ,

तुम आशाओं की छावं लिए बस चलते रहना ,

कभी गिरके सँभालने में वक़्त जो लगे ,

तुम खुद के दायरों को कभी सीमित न करना ,

आज इस अँधेरे का डर क्यूँ है तुम्हें ?तुम सिर्फ जुग्नूओं की रौशनी को चाँद के माफिक समझना ,

हौसला टूटे न कभी ये सोच लो तुम भी ,अपनी कोशिशों को कभी जाया न करना ,

आज मायूस क्यूँ हो तुम ?किसलिए दुश्वारियों का डर तुम्हें ?

मेहनत  के पुलिंदों और खुद पर विश्वास का मिलेगा प्रतिफल तुम्हें ,

सीने में दहक फिर भी आँखों में चमक लिए तुम आगे बढ़ना

 

रास्ते चलते ही रहते हैं मंजिलें भी राहों में ही मिल जाती हैं ,
राहें कुछ और आगे बढ़ जाती हैं,
कभी कहीं दूर तो कभी पास ही मंजिलों के ठिकाने तय कर जाती हैं ,
हमें किन्ही समय के पहलुओं को गिनने की जरुरत पड़ती भी क्यूँ है ?
ये तयशुदा समय तक हुबहू  हमशक्ल ठिकानों तक हमे पहुंचाती हैं ,
रास्तों का क्या कसूर ?
रास्तों की कुछ किस्से कवायदों का वाकया याद भी रहता है हमें ,
ये रास्ते ही तो हैं जो जिंदगी को जिंदगी बनाते हैं ,
कभी भी कहीं भी ये रास्ते नई सीख दे जाते हैं ,
ये रास्ते समय के उसूलों का परचम लहराते हैं ,

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ये कवितायें …..

हम कविताओं को कविताओं की तरह ही जीते हैं ,
हमशक्ल हुबहू भावनाओं को शब्दों में पिरोते है ,
हम चाहते नहीं के कभी कोई व्याकरनी बाधाएं मेरी कविताओं के आवेग ,उसकी गति में कोई रोक टोक लगाएं ,
बस जैसे जिस रूप में मन से बात निकली है वो लोगों तक पहूंच जाये ,
क्यूँ  बिना वजह हम भावनाओं की जलधारा इस कविता रूपी श्रीन्खला में किन्ही नियमों की दखलंदाजी करें ,
सच लिखना है जब तो सार्थक शब्दों के क्रम को स्वयं अनुरूपित ही करें ,
हमें जितनी भी पहचान मिली मेरे शब्दों मेरी भावनाओं ने दिलाई है ,
माँ सरस्वती की कृपा है जो ये कवितायें मेरे मन में उतर आई हैं ,
जग में मेरी भावनाओं को कविता रूपी अंजाम दिलाई हैं ,

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मांग लूं हर एक दुआ …..

“मांग लूँ हर एक दुआ ,जो इस दिल के ख्वाहिशों का अंदाज़ा लगाती है ,

कभी आसमां तो कभी जमीं पे पंखों के परवाज़ का कारवां बनाती  है “

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जरूरी है…….

मेरे लिए जरूरी है के मैं संभल जाऊं,

                                      बिखर जाऊं,

                                      निखर जाऊं,

खुद के दायरे में यूं ही अब संभल जाऊं

मेरे लिए जरुरी है …….

आँखों से कनखिया काटने लगी हैं ,

ये शामो शहर हर पलछिन ,

अब जरुरी तो है के ,

मैं वास्तविकता को समझ जाऊं

हद हो चुकी है ,

कल्पनाओं की पहरेदारी की,

अब जरुरी है के,

मैं यूँ ही वस्ताविक़ता को  पहलुओं में

ढालना सिख जाऊं,

मेरे लिए जरुरी  है……

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सारी दुनिया से कहदो ……..

सारी दुनिया से कहदो के ,

 हमे दुनियादारी  की समझ नहीं ,

सारी खुशियों से कहदो के हमें, खुशियों की कदर नहीं

सारी दुनियां ……….

सारी आरज़ू में ढलकर हम फिर भी नया पयाम लिखते हैं

आंसुओं में ढ़लते हुए मुस्कानों का नया आयाम लिखता हैं ,

सारी दुनिया से कहदो ……..,

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किसने खुश्बुओ का ये रंग चुराया है….

 

किसने खुशबुओं का ये रंग चुराया है,

किसने खुश्बुओ को दिल से लगाया है,

क्यूँ खिलने लगे हैं गुलाब,

मौसम में बहार बनकर,

किसने सोई हुई आरज़ू को

फिर से जगाया है,

किसने खुश्बुओ का ये रंग चुराया है…..;

#Quotes

“घर का कोई ऐसा कोना नहीं है,

 जहाँ धूप का बिछौना नहीं है।।”

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“धूप देखकर ललचाता है     मन,

जाने कितनी बातें भी बनाता है मन,

हजार उदासीयों के बीच,

फिर से खिलखिलाता है मन।। “

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“बन्दिशें हैं रूआसी हसरतों   के माफिक,

 जाने क्यूँ सच से नजरें भी   चुराता है मन,

 अब तो हजारों सपनों को     इन पलकों में

 बसाता है मन।। “

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🙏🌷जगतजननी माँ🌷🙏

माँ,ममता,समता, ज्योति भी तुम,                            जीवन भी तुम,                            आधार भी तुम,                             साँस तुम,                                   संसार भी तुम,   🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

जीवन की चाह जीने की शक्ति तुम,                               भावनाओं की उद् गार हो तुम,                       शत् शत् नमन हे माँ,      🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

सपनीली सी आँखों का संसार हो तुम।।                                      माँ ,ममता ,समता, ज्योति भी तुम,                            ………सारा संसार हो तुम ।।       🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏                  🌺🌺🌺🌺🌺🌺