रास्ते चलते ही रहते हैं मंजिलें भी राहों में ही मिल जाती हैं ,
राहें कुछ और आगे बढ़ जाती हैं,
कभी कहीं दूर तो कभी पास ही मंजिलों के ठिकाने तय कर जाती हैं ,
हमें किन्ही समय के पहलुओं को गिनने की जरुरत पड़ती भी क्यूँ है ?
ये तयशुदा समय तक हुबहू  हमशक्ल ठिकानों तक हमे पहुंचाती हैं ,
रास्तों का क्या कसूर ?
रास्तों की कुछ किस्से कवायदों का वाकया याद भी रहता है हमें ,
ये रास्ते ही तो हैं जो जिंदगी को जिंदगी बनाते हैं ,
कभी भी कहीं भी ये रास्ते नई सीख दे जाते हैं ,
ये रास्ते समय के उसूलों का परचम लहराते हैं ,

www.smritisnehablogs.com

ये कवितायें …..

हम कविताओं को कविताओं की तरह ही जीते हैं ,
हमशक्ल हुबहू भावनाओं को शब्दों में पिरोते है ,
हम चाहते नहीं के कभी कोई व्याकरनी बाधाएं मेरी कविताओं के आवेग ,उसकी गति में कोई रोक टोक लगाएं ,
बस जैसे जिस रूप में मन से बात निकली है वो लोगों तक पहूंच जाये ,
क्यूँ  बिना वजह हम भावनाओं की जलधारा इस कविता रूपी श्रीन्खला में किन्ही नियमों की दखलंदाजी करें ,
सच लिखना है जब तो सार्थक शब्दों के क्रम को स्वयं अनुरूपित ही करें ,
हमें जितनी भी पहचान मिली मेरे शब्दों मेरी भावनाओं ने दिलाई है ,
माँ सरस्वती की कृपा है जो ये कवितायें मेरे मन में उतर आई हैं ,
जग में मेरी भावनाओं को कविता रूपी अंजाम दिलाई हैं ,

www.smritisnehablogs.com

 

मांग लूं हर एक दुआ …..

“मांग लूँ हर एक दुआ ,जो इस दिल के ख्वाहिशों का अंदाज़ा लगाती है ,

कभी आसमां तो कभी जमीं पे पंखों के परवाज़ का कारवां बनाती  है “

www.smritisnehablogs.com

जरूरी है…….

मेरे लिए जरूरी है के मैं संभल जाऊं,

                                      बिखर जाऊं,

                                      निखर जाऊं,

खुद के दायरे में यूं ही अब संभल जाऊं

मेरे लिए जरुरी है …….

आँखों से कनखिया काटने लगी हैं ,

ये शामो शहर हर पलछिन ,

अब जरुरी तो है के ,

मैं वास्तविकता को समझ जाऊं

हद हो चुकी है ,

कल्पनाओं की पहरेदारी की,

अब जरुरी है के,

मैं यूँ ही वस्ताविक़ता को  पहलुओं में

ढालना सिख जाऊं,

मेरे लिए जरुरी  है……

www.smritisnehablogs.com

सारी दुनिया से कहदो ……..

सारी दुनिया से कहदो के ,

 हमे दुनियादारी  की समझ नहीं ,

सारी खुशियों से कहदो के हमें, खुशियों की कदर नहीं

सारी दुनियां ……….

सारी आरज़ू में ढलकर हम फिर भी नया पयाम लिखते हैं

आंसुओं में ढ़लते हुए मुस्कानों का नया आयाम लिखता हैं ,

सारी दुनिया से कहदो ……..,

www.smritisnehablogs.com

Snehablogs2017@wordpress.com

किसने खुश्बुओ का ये रंग चुराया है….

 

किसने खुशबुओं का ये रंग चुराया है,

किसने खुश्बुओ को दिल से लगाया है,

क्यूँ खिलने लगे हैं गुलाब,

मौसम में बहार बनकर,

किसने सोई हुई आरज़ू को

फिर से जगाया है,

किसने खुश्बुओ का ये रंग चुराया है…..;

#Quotes

“घर का कोई ऐसा कोना नहीं है,

 जहाँ धूप का बिछौना नहीं है।।”

🌤️🌤️🌤️🌤️🌤️🌤️🌤️🌤️🌤️🌤️

“धूप देखकर ललचाता है     मन,

जाने कितनी बातें भी बनाता है मन,

हजार उदासीयों के बीच,

फिर से खिलखिलाता है मन।। “

🌤️🌤️🌤️🌤️🌤️🌤️🌤️🌤️🌤️

“बन्दिशें हैं रूआसी हसरतों   के माफिक,

 जाने क्यूँ सच से नजरें भी   चुराता है मन,

 अब तो हजारों सपनों को     इन पलकों में

 बसाता है मन।। “

www.smritisnehablogs.com

Snehablogs2017@wordpress.com

 

 

🙏🌷जगतजननी माँ🌷🙏

माँ,ममता,समता, ज्योति भी तुम,                            जीवन भी तुम,                            आधार भी तुम,                             साँस तुम,                                   संसार भी तुम,   🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

जीवन की चाह जीने की शक्ति तुम,                               भावनाओं की उद् गार हो तुम,                       शत् शत् नमन हे माँ,      🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

सपनीली सी आँखों का संसार हो तुम।।                                      माँ ,ममता ,समता, ज्योति भी तुम,                            ………सारा संसार हो तुम ।।       🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏                  🌺🌺🌺🌺🌺🌺

 

 

🌈📃हिंदी दिवस📃🌈

कैसे मान लूँ के हिंदी दिवस है?

कैसे जान लूँ के हिंदी दिवस है?

📃📃📃📃📃📃📃📃📃

हिंदी को हिंदवासियों ने सताया है,

जाने किसलिये हमारी राष्ट्रभाषा ने इतना कष्ट उठाया है।

📃📃📃📃📃📃📃📃📃📃📃

क्या हिंदी हिंदुस्तानीयों की पहचान नहीं?

क्या बोली -भाषा ,गीत- संगीत,साहित्य संस्था में हिंदी का मान नहीं?

📃📃📃📃📃📃📃📃📃📃📃

फिर क्यों हर बार ही हिंदी के साथ दोहरा रवैया अपनाते हैं?

कभी कहते हैं हिंदी हमारी है,

कभी बड़े शौक से कहते हैं कि,

साहब हमारे बच्चों को तो हिंदी ही नहीं आती है,

कैसे, कोई बताये के मेरे राष्ट्र की मेरे देश की पहचान हिंदी है।

📃📃📃📃📃📃📃📃📃📃📃

हिंदी मेरी भाषा ,मेरी बोली है।

हिंदी को हिंदवासियों  इतना ना सताओ,

हो सके तो हिंदी की जननी संस्कृत को भी अपनाओ।

📃📃📃📃📃📃📃📃📃📃📃📃

ऐसे कैसे तुम अपनी पहचान भूल जाते हो ?

अपनी भाषा अपनी संस्कृति के गीत तो गुनगुनाते हो,

फिर भी हिन्दवासियों हिंदी को हिंद की आधारशिला, क्यूँ नहीं मानते हो?

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

“स्मृति स्नेहा”

www.smritisnehablogs.com

 

“थोड़ी सी धूप🌥🌥🌥”

सिर्फ उतनी ही धूप आती है मेरे घर में,

जितना के मैं मुस्कुराती हूँ,

🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤

अब ये बात और है के कभी कभी

मैं खुद को पहेलीयाँ भी बुझाती हूँ,

नए रंग नए रौशनी में नहाए हुए हर किरण

का दस्तूर है के,

वो बादलों से ऊँची होकर भी ,

धरती तक पहुँचने की जिद करती है।

🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤

बादलों ने तो उड़ते हुए,

नीले अम्बर का आकाश बनाया,

खुद का नीला नीला संसार बनाया।

पर रौशनी रौशनी धूप की किरण में चमकती हुई धरती तक आती है।

🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤🌤

कभी कभी हर किरण धरती तक पहुँच भी नहीं पाती है,

और बादलों के साजिशों में उलझ के रह जाती है…..

उतनी ही धूप………….🌤🌤🌤🌤🌤

🌤🌤🌤🌤🌤🌤…….!!!!!!!

“स्मृति स्नेहा”

www.smritisnehablogs.com